धूमिल 

भारत में अनेक कवि ऐसे हुए हैं ,जिन्होंने राजनीतिक भ्रष्टाचार व भ्रष्ट नेताओं का अपनी कविता के माध्यम से विरोध किया हैं उन्हीं में से एक हैं 'धूमिल'

by Kapil                              05/03/2024

राजनीति -

यह जनतंत्र  जिसकी रोज सेंकडों बार हत्या होती हैं और हर बार  वह भेड़ियों की जुबान पर जिन्दा हैं 

न्याय -

न्याय को राजनेताओं के हाथ की कठपुतली बनते देखना एक सच्चे देशभक्त के लिए विशेषकर जब वह कवि हो असहनीय स्थिति होती हैं 

परिचय -

जन्म :- 9 नवंबर 1936(वाराणसी ) पूरा नाम :-सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' मृत्यु :- 10 फ़रवरी 1970 

संसद -

अपने यहां संसद  तेली की वह घानी हैं  जिसमे आधा तेल हैं  आधा पानी हैं 

भूख -

भूख से रिरियाती हुई हथेली का नाम  दया हैं  और भूख से  तनी हुई मुट्ठी का नाम  नक्सलवाड़ी हैं 

जनतंत्र -

दरअस्ल ,अपने यहां जनतंत्र  एक ऐसा तमाशा हैं  जिसकी जान  मदारी की भाषा हैं 

अल्बर्ट आइंस्टीन  

अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुसार सफलता क्या है ?  आज ही जाने