अद्वेत वेदांत का ज्ञान देने वाले आचार्य  तवशांत की 6 पुस्तके हैं जिनका अध्यन करके हम अपनी जीवन की उलझनों को सुलझा सकते है 

इसे पुस्तक में आचार्य जी ने प्रेम की सही परिभाषा बताते हुए उसके महत्व पर बल दिया हैं एवम प्रेम के अर्थ को एक सही दिशा प्रदान की हैं 

आचार्य प्रशांत ने इस पुस्तक में माया की सही और सूक्ष्म परिभाषा  देते हुए इससे दूर होने के या इसके त्याग का  तरीका भी बताया हैं 

आचार्य जी का कहना हैं की लोभ  लालच और भोग की इच्छा ही हमारे डर का कारण हैं इससे जितने का उपाय इस पुस्तक में दिया गया हैं 

समाज में परिवर्तन का पहला स्वरूप ही क्रांति हैं  मनोबल बढ़ाने वाली इस पुस्तक का अध्यन आज के युवा को अवश्य करना चाहिए 

अकेलापन व्यक्ति को साहसी बनाता हैं और निर्भरता भी उसकी स्वयं पर हो जाती हैं 

आचार्य जी ने गीता के अध्यन पर बल देते हुए उसके संक्षिप्त रूप को कर्मयोग नाम से प्रकाशित करवाया हैं 

किताबें पढ़ने की आदत बदल सकती हैं आपकी जन्दगी और किस्मत